Christmas Day 2023:”चमकता हुआ क्रिसमस- इस खास दिन का महत्व जानिए, क्यों है सजग दिलों की रौंगतें बढ़ाता Christmas Day 2023!”

Kamaljeet Singh

Christmas Day: आज 25 दिसंबर को पूरी दुनिया में क्रिसमस का खास त्योहार है। इस दिन पूरे विश्व में लोग खुशी और मिठास के साथ मिलकर प्रभु ईसा मसीह के जन्मदिन को मनाते हैं। यह ईसाई धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है, लेकिन समय के साथ इसे सभी धर्मों और समृद्धि के लोगों ने अपनाया है। क्रिसमस के इस प्यार भरे मौसम में, लोग एक दूसरे के साथ प्रेम और सद्भाव का आत्मवाद करते हैं। घरों में हर जगह रौंगत है और हर कोने में खुशियाँ बिखरी हैं। क्रिसमस के इस खास मौके पर, लोग अपने प्यार के अभिवादन के रूप में उपहार आपस में बाँटते हैं और मिलते हैं। खासकर, केक काटकर और साथ में मिठा-मिठा खाने का आनंद लेते हैं। क्रिसमस का खास हिस्सा है क्रिसमस ट्री, जो हर घर में सजता है। इसे खूबसूरती से सजाकर रंग-बिरंगे लाइट्स और सजीवता से भर दिया जाता है। क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे एक रोचक कथा छिपी है?

सबसे पहले, इस कथा में एक छोटा सा गरीब बच्चा शाम के समय एक जंगल में भटक रहा था। वह बच्चा अकेला था और उसे भूख और ठंड से जूझना पड़ रहा था। तभी एक दिन, उसने एक बड़े पेड़ को देखा और महसूस किया कि उसका दिल कह रहा है कि वह इसे अपने घर के रूप में सजाकर उसे सुंदर बनाए। बच्चा ने पेड़ के नीचे पहुंचकर उसे सजाने का काम किया। वह जंगल से झूले, फूल और चमकीली बर्फ लेकर आया और उन्हें पेड़ पर सजाकर एक सुंदर क्रिसमस ट्री बना दिया। इस प्रकार, बच्चा ने अपनी आदत बना ली कि हर साल वह उसी पेड़ को सजाकर क्रिसमस मनाएगा और उसके नीचे बैठकर खुशियों का स्वाद लेगा। और इसी तरह से, क्रिसमस ट्री ने उस गरीब बच्चे को खुशी और खुद पे भरोसे का एहसास कराया।

Christmas Day

इसलिए हम आज भी क्रिसमस मनाते हैं और अपने घरों में क्रिसमस ट्री सजाते हैं, ताकि हम भी उस गरीब बच्चे की भावना को समझ सकें और प्रेम और सद्भाव की भावना के साथ जी सकें। इस प्यार भरे दिन में, हम सभी को चाहिए कि हम भी दूसरों के साथ संबंध बनाएं, उन्हें प्यार और धन्यवाद दें और सबके साथ मिलकर एक खास क्रिसमस का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएं।

Christmas Day: क्रिसमस ट्री का इतिहास 

सच्चाई यह है कि क्रिसमस ट्री को लेकर कई किस्से हैं। एक किस्सा है कि 16वीं सदी के ईसाई धर्म के धरोहर मार्टिन लूथर ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। मार्टिन लूथर एक बर्फीले जंगल से जा रहे थे, और 24 दिसंबर की शाम को उन्होंने एक सुंदर सदाबहार पेड़ देखा। पेड़ की डालियां चांद की रोशनी में चमक रही थीं। मार्टिन ने इस पेड़ को देखकर खुद भी एक सदाबहार पेड़ लगाया और उसे छोटे-छोटे कैंडल से सजाया।

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इसके बाद, मार्टिन ने जीसस क्राइस्ट के जन्मदिन के मौके पर भी इस सदाबहार पेड़ को सजाया और उसे कैंडल की रोशनी से चमकाया। इससे शुरू हुई क्रिसमस ट्री लगाने की परंपरा।

Christmas Day:  क्रिसमस ट्री से जुड़ी बच्चे की कुर्बानी की कहानी

722 ईसवी के एक समय की बात है, जब जर्मनी में पहला क्रिसमस ट्री सजाने का आरंभ हुआ था। एक दिन, सेंट बोनिफेस ने सुना कि कुछ लोग एक बच्चे की कुर्बानी के लिए एक बड़े ओक ट्री के नीचे जा रहे हैं। सेंट बोनिफेस ने तत्पश्चात् जल्दी ही ओक ट्री को काट दिया, ताकि बच्चा कुछ न हो जाए।

जब ट्री को काटा गया, तो वहां से एक नया पेड़, एक सनोबर, बढ़ा। लोग इस पेड़ को देखकर हैरान हो गए और उसे चमत्कारिक माना। सेंट बोनिफेस ने उन्हें बताया कि यह एक पवित्र दैवीय वृक्ष है और इसकी डालें स्वर्ग की ओर इशारा करती हैं। इसके बाद से, लोग हर साल प्रभु यीशु के जन्मदिन पर इस पवित्र वृक्ष को सजाने लगे हैं।

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